Author Topic: जिन्दगी जब बेबस करने पर उतर आती हैं, तो सारी होशियारी धरी की धरी रह जाती हैं!  (Read 231 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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सुबह सुबह Whats App के बड़े से Family group में, दूसरे planet के किसी दूररररर के रिश्तेदार का message आता हैं,
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" इस massage को अभी के अभी 100 लोगों को भेजिए! मन कि सारी मुराद पूरी होगी!"
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लेकिन मुझसे इस message को ignore कर दिया जाता हैं!
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थोड़ी देर बाद, जो मॅसेज group मे आया था, वहीं शख्स... वहीं message... अब direct मुझे भेजता हैं!
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लेकिन फिर मुझसे इस message को ignore कर दिया जाता हैं!
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उसी दिन.. शाम के वक्त... वहीं शख्स... वहीं message, फिरसे group में भेजता हैं! लेकिन इस बार irritate होकर, mummy को सवाल पुंछा जाता हैं...
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"कौन हैं यार ये शख्स?"
"वो??? वो Doctor हैं!"
"क्या??? वो doctor हैं???"
"हाँ! उसकी wife भी doctor हैं!"
"उसकी wife भी doctor हैं??"
"हाँ ना!! बेचारे!!"
"बेचारे?? बेचारे क्यों??"
"16 साल होगए शादी को! लेकिन बच्चा हि नहीं होरहा हैं! क्या कुछ नहीं किया उन्होंने!!"
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इतना सुनकर एक अजीब सी ख़ामोशी छा जाती हैं! जेहन सोचने पर मजबूर हो जाता हैं! अबतक जिस शख्स कि बेवकूफी पर गुस्सा आ रहा था, अब उसकी लाचारी पर तरस आने लगता हैं!
कभी किसी रोज़, एक quote पढ़ा था!
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Every story has three sides!
Yours!
Theirs!
& the truth!
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और अक्सर हम इस "Truth" के बारे में सोचते तक नहीं हैं!
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College के दिनों में... 4 बार back आने पर भी, 5 वी बार जिस subject में 100 में से 12 marks मिलते हैं, फिर भी वो student उस paper को पैसे भरकर rechecking के लिए डालता हैं, तो सारे उसपे हँसते हैं! हालाँकि हँसी तो उसे भी खुदपर आती हैं! क्यूँ की अंजाम पता होता हैं! लेकिन अगर ऐसा करने से, "नामूमकीनसी" ही सही, पर एक उम्मीद जिन्दा रहती हैं, तो लोगों के हँसने से फर्क नहीं पड़ता!
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ज़िन्दगी के तजुर्बे से इतना तो सीख हि लिया है... कि लगने वाला हर शख्स बेवकूफ नहीं होता! बस ये ज़िन्दगी जब बेबस करने पे उतर आती हैं, तो सारी होशियारी धरी की धरी रह जाती हैं!
~ श्रद्धा चंदनगिर