Author Topic: जिये जा रहा हु  (Read 620 times)

Offline shardul

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जिये जा रहा हु
« on: February 10, 2016, 11:38:27 PM »

किसपर भरोसा करू और किस पर ना करू समज नहीं पा रहा हु !
जिंदगी को समजने की कोशिश कर रहा हु !
मै बस युही जिये जा रहा हु !

बदलाव तो जिंदगी का नियम है !
बदलने का प्रयास जरुर कर रहा हु !
जीवन के आधार को समजने की कोशिश कर रहा हु !
मै बस युही जिये जा रहा हु !

कुछ नये रिश्ते जुड़ रहे है, कुछ पुराने रिश्ते छुट रहे है !
रिश्तो की अहेमियत को समजने की कोशिश कर रहा हु !
मै बस युही जिये जा रहा हु!

जो अच्छा मिले उसे पाने की कोशिश है !
जो है बेकार उसे पीछे छोड़ते चला जा रहा हु !
जिंदगी के रास्तो को समजने की कोशिश कर रहा हु !
मै बस युही जिये जा रहा हु !

सचिन पत्तेवार

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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