Author Topic: बिन लफ्जोंका खयाल हूँ  (Read 540 times)

Offline dhanaji

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बिन लफ्जोंका खयाल हूँ
« on: February 11, 2016, 10:50:16 PM »

बिन लफ्जोंका खयाल हूँ
लफ्ज मिलें तो कमाल हूँ
ख़्वाब दिखाई नहीं दिया
अंधेपनकी मिसाल हूँ
देख समंदर समा गया
शायद तेरा रुमाल हूँ
क्या बोलूंगा पता नहीं
खुदसे खुदका सवाल हूँ
फिरसे ताज़ा हवा चली
फिर मै जलती मशाल हूँ
जयदीप CA Jaydeep Joshi

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