Author Topic: पथिक  (Read 516 times)

Offline ajeetsrivastav

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पथिक
« on: February 12, 2016, 10:06:15 PM »
मै पथिक चलता रहूँगा
श्रम अथक करता रहूँगा
पथ कठिन शूलित डगर हो
मै अडिग बढ़ता रहूँगा
मै पथिक चलता रहुंगा ।।
ध्येय कर के लक्ष्य को
छोड़ कर अश्रित्य को
मै सरित जल सा निरंतर
लक्ष्य तक बहता रहूँगा
मै पथिक चलता रहूँगा ।।
ना मेरी बुद्धि प्रखर है
ना मेरा कौशल प्रबुद्ध है
मै पथिक अज्ञान हू
किन्तु मेरा भाव सुद्ध है
मै तो बस एक ध्येय साधकर
लक्ष्य तक बढ़ता रहूँगा
मै पथिक चलता रहूँगा ।।
पाँव में जो काटे लगे
लगते मुझे सब फूल है
राह में जो तम घना
लगता मुझे निर्मूल है
साहस मुझे देते है सब
जो मेरे प्रतिकूल है
यदि चल रहा हू मै अथक
तो सब मेरे अनुकूल है
रोक लेंगे पथ मेरा
प्रतिरोध की ये भूल है
अवरोध क्या है मै कहू
पैरो की ये तो भूल है
मै सफ़र में आज हु
लक्ष्य का जो मूल है
करते प्रखर है चेतना
जो मग में मेरे शूल है
शूल पे मै सुरभि सा
मार्ग पर बढ़ता रहूँगा
मै पथिक चलता रहूंगा ।।
मै तरुण अपने चरण से
थान कर अंतः करण से
बिन किसी के अनुसरण के
यदि चला हू लक्ष्य को
तो लक्ष्य तक को पाकर रहूँगा
मै पथिक चलता रहूँगा
मार्ग पर बढ़ता रहूँगा।।

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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