Author Topic: ओ पिया  (Read 513 times)

Offline dhanaji

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ओ पिया
« on: February 15, 2016, 11:59:52 AM »

ओ पिया
आग लगाए बोगनबेलिया!
पूनम के आसमान में
बादल छाया,
मन का जैसे
सारा दर्द छितराया,
सिहर-सिहर उठता है
जिया मेरा,
ओ पिया!
पछुआ की साँसों में
गंध के झकोरे
वर्जित मन लौट गए
कोरे के कोरे
आशा का
थरथरा उठा दिया!
ओ पिया
- कन्हैयालाल नंदन

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