Author Topic: सर्दियों में भला किस काम की ये छाँव  (Read 146 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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ये माना की उनसे आज भी हैं लगाव, क्या कहिए
लेकिन दरमियाँ हो गया हैं मनमुटाव, क्या कहिए।

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हम तो इसी फ़िराक़ मे हैं, कि डूबोए  भवर हमको
पर रफ़्तार मे  हैं ज़िन्दगी का बहाव, क्या  कहिए।

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कितने नौजवान सर को हाथ पकड़े कहते फिरते हैं
अब तो ख़ैर हम ख़ेल  ही चुके ये दाँव, क्या कहिए।

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ज़िन्दगी की कड़ी धूप, हम झेल भी चुके अब क्या
सर्दियों में भला किस काम की ये छाँव, क्या कहिए।
~ श्रद्धा

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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