Author Topic: छोटी छोटी बातों पे, क्यूँ अड़ जाते हैं हम...  (Read 546 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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छोटी छोटी बातों पे, क्यूँ अड़ जाते हैं  हम
ख़ामख़ा की बातों में, क्यूँ पड़ जाते हैं हम।
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अब रुके  हैं तो रुकने का, सबब मालूम हो
बिना बोले यूँ ही आगे, क्यूँ बढ़ जाते हैं हम।
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मुद्दा हैं की बैठकें जरा बातों का हल निकले
सुलझाने की बजाय, क्यूँ लड़ जाते हैं  हम।
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कानून  ज़रा अलग हैं, इंसानों मे मौसम का
गरम हो जाएँ रिश्ते, तो अक़ड जाते  हैं हम।
~ श्रद्धा

Marathi Kavita : मराठी कविता


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Aapki bahut si lines padhi hai maine, kafi achaa likhhteee hooo aap....