Author Topic: दिवारें  (Read 129 times)

Offline शिवाजी सांगळे

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  • या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे.....
दिवारें
« on: May 26, 2018, 05:08:31 PM »
दिवारें

दिवारें जो शायद बोल उठती?
ना जाने कितने राज खोलती,
खुशियों को दबाये हुये सीने में
गमों को याद कर अकेले रोती!

तस्वीरें जो सजाई थी सीने पर
समयके थपेड़ो मे धुंधली होती,
टूटते हुये रिश्तों को देख कर वो
चाहकर भी रंग नहीं बदलती!

© श्री शिवाजी सांगळे 🎭
संपर्क:९५४५९७६५८९
« Last Edit: May 26, 2018, 05:37:25 PM by शिवाजी सांगळे »

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