Author Topic: एक अनसुलझा सवाल जिंदगी ....  (Read 121 times)

Offline yogita ghumare

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पता नहीं  क्यू  वक़्त जैसे  थम सा गया है ,
गम के अँधेरे में खुशी का साया गुम सा गया है।
जिस जमीन पर कभी जिंदगी की बागों में
खुशियों के फुल खिला करते थे  ,
आज अचानक से वोह  बंजर सी हो गई है।
एक वक़्त हुआ करता था जब जिंदगी में हर सवाल का जवाब हुआ करता था,
मगर वही जिंदगी आज खुद ही एक अनसुलझा सवाल बन गई है।
       
                                                      ~योगिता  घुमरे