Author Topic: राजदार  (Read 113 times)

Offline sanjweli

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राजदार
« on: July 13, 2018, 12:17:25 AM »
दर्द अश्कोंका नाता।
 मेरे दिलसे गहरा है।
चोट तो यारों यहाँ।
नाजुक गुलोंसे ही होती है।

तेरी मेरी मुहब्बत को।
 ऐ जाहील दुनिया क्या समजेगी।
तेरे मेरे प्यार का।
तो राजदार खुद-ब-खुद अब खुदा है।

अल्फाजों के आगाज पर।
 गुमनाम हैं दिल का अफसाना।
फ़रियादी तेरे दर पे ऐ खुदा।
 आया पाकीज़ा आफताब है।

 गर्दिशोमें अर्श मैं अब।
क्युं धुंडु यहाँ-वहाँ।
बस अब मुझे ऐ परवरदिगार।
मेरे चांद की आस हैं।

आरजु ना कोई मेरी।
 ना अश्फाक किसीका चाहता हूँ।
तोडकर कब्रका दामन देख।
मेरी रुह तुझसें मिलने आयी हैं।

©म.वि.
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