Author Topic: वक्त  (Read 103 times)

Offline sanjweli

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वक्त
« on: July 13, 2018, 12:26:20 AM »
रंग बदलती दुनिया सारी
रंग है ना कोई पानी का
अपने सारे अब अनजाने
रंग न बदला पर तेरें आसमाँ का

सुन ले तू ए परवरदिगार
आये थे जब हम तेरी
रंगबिरंगी नयी नवेली दुनियामें
हात हमारे थे खाली
नक्शे अपने आप रास्ते बनते चले गए
हर मंझिल कदमोंमे आ गयी


सुन ले ए खुदा तब भी
बंदेने तेरे देना सीखा है
तकदीर खुली
भर गयी किस्मत की झोली
मगर लुटने वालोने
कहाँ हमे  छोडा है

चाहे ठोकर हो अपनोंकी
गर्दीशों, सैलाबोंसे लढणा
फ़ितरत है मेरी
नियत चाहे अच्छी हो या बुरी
आती नजर वो साफ है
पहचान मिलती है यहाँ सबकी
वक्त की तो ए बात खास है

© कवी-म.वि.
©sanjweli
9422909143

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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