Author Topic: लेकिन सीमा होती हैं ........  (Read 413 times)

Offline SHASHIKANT SHANDILE

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  • शशिकांत शांडिले, नागपुर
लेकिन सीमा होती हैं ........
« on: October 01, 2018, 01:25:34 PM »
माना कि संस्कार तुम्हारा
विवेक कभी न खोना हैं
कोई कितना कड़वा बोले
काम मगर सह जाना हैं

लेकिन भैया कब तक ऐसे
आँख मूंदकर बैठोगे
अधिकार अपने हिस्से का
गैरों को फोकट बाँटोगे

बंदर सारे उछल उछल कर
तुमको आँख दिखाते हैं
हक छीन कर आज तुम्हारा
तुमको बोल सुनाते हैं

माना अपना दिल बड़ा हो
लेकिन सीमा होती हैं
किस काम की ये जिंदगी
सब कुछ सह कर रोती हैं
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शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०
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