Author Topic: उनसे अब ना शिकवा गिला  (Read 232 times)

Offline कवी अमोलभाऊ शिंदे पाटील

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 90
  • Gender: Male
  • कविराज अमोल शिंदे पाटील
उनसे अब ना शिकवा गिला
« on: December 25, 2018, 06:54:42 AM »
*पुन्हा एकदा हिंदी कविता आपल्या भेटीसाठी*

*शीर्षक.उनसे अब ना शिकवा गिला*

उसने भी काटे बोये थे
जो खून भरा पौधा मिला
जो अपने ना हो सके
उनसे अब ना शिकवा गिला

राख हो गये सपने अपने
उन्हें याद करके अब तो
दूसरों का हाथ थामकर बोले
पागल पीछा छोड़ दे अब तो

मैं भी कितना बदनसीब
पागल उन्होंने ही किया
दूसरों की और बात थी
उन्होंने मुझे ही इल्जाम दिया

इल्जाम भी लगाने की हद थी
खून के आँसू निकल रहे थे
जिस रब ने मिलाया था उनसे ही
मेरे मरने की दुआ कर रहे थे

✍🏻(कवि.अमोल शिंदे पाटिल).
मो.९६३७०४०९००.अहमदनगर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline Vaibhav Talekar

  • Newbie
  • *
  • Posts: 2
  • Gender: Male
Re: उनसे अब ना शिकवा गिला
« Reply #1 on: December 26, 2018, 07:57:11 PM »
भावा तूझी कविता छान आहे.🤘..
एखादी मराठीत पन कर..👉 तीच तर आपली शान आहे ..😘