Author Topic: हे गणपती मंगलमुर्ती  (Read 216 times)

Offline sachinikam

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हे गणपती मंगलमुर्ती
« on: September 23, 2018, 03:03:11 PM »

हे गणपती मंगलमुर्ती

हे गणपती मंगलमुर्ती
दुमदुमली हां तुझीच किर्ती
खुलले अंबर नाचली धरती
दर्शनास भक्तांची भरती
नामघोषाने हां येई स्फुर्ती
एकमुखाने गातो आरती.

बाप्पा मोरया आले अंगणा
आरास मंडपी पताका गगणा
उत्सव आनंदी सोहळा देखणा
ढोल ताशे निनाद गर्जना
स्वागता सज्ज देवा गजानना
शुभकार्याची दे आम्हांस प्रेरणा.
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रचना: सचिन कृष्णा निकम, पुणे.
कवितासंग्रह: मुरादमन
sachinikam@gmail.com
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Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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