Author Topic: * ज्युदाई *  (Read 246 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* ज्युदाई *
« on: November 13, 2015, 06:54:14 PM »
देखकर समंदर की लहरें
ऐसा लगता है हर बार
ज्युदाई तो लिखी ही है
फिरभी किनारेसे मिलती है बारबार.
कवी - गणेश साळुंखे.
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