Author Topic: * दिल और दिमाग *  (Read 354 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* दिल और दिमाग *
« on: November 17, 2015, 10:30:24 PM »
दिल की सुनु या दिमाग की
इसी कशमकश में हुँ यारों
दिल तो उसे चाहता है बेपनाह
पर दिमाग भुलता नहीं उसके गुनाह.
कवी - गणेश साळुंखे.
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