Author Topic: न हमसे कोई नाराजगी, और मोहब्बत भी हमीसे...  (Read 400 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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जो शिकवे थे बरसों से वो पल में खत्म हो गए
ये मेहरबानी थी हमपे, या नए सितम हो गए।
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न हमसे कोई नाराजगी, और मोहब्बत भी हमीसे
हैरत हैं के हमको भी ये कैसे कैसे भरम हो गए।
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आखिर मोहब्बत से आजादी? वाह क्या सजा हैं
चलो शुक्र हैं ऐ मालिक, तेरे हमपे करम हो गए।
~ अनामिका
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मुकम्मल गजल फिर कभी....

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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