Author Topic: उन्हें भुल के उन पर इक एहसान कर आएं हैं...  (Read 385 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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उन्हें भुल के उन पर इक एहसान कर आएं हैं
जरा देखिए हम मुनाफे में नुकसान कर आएं हैं।
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बड़ी नाजो से संभाले थे इक अरसे से जो गुलाब
आज अपने ही गुलिस्ताँ को हम शमशान कर आएं हैं।
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अपनी ही मिल्कीयत में वो था जो दिल अब तक
उसी दहलीज पे खुद को इक मेहमान कर आएं हैं
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इस खामोशी से निभाया फर्ज सच्ची मोहब्बत का
की लगता हैं अब खुद को हम बेजुबान कर आएं हैं।
~ अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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