Author Topic: कही ये इश्क़ ए हक़ीकत तो नही  (Read 496 times)

Offline sameer3971

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समझ ने दो इन लब्जों को अभी
कही ये दास्तान ए बयान तो नही
संभाल ने दो इन ख़यालों को अभी
कही ये इश्क़ ए हक़ीकत तो नही !!

यूही ज़ज्बात उमड़ आए है अभी
कही ये दिल ए नादान तो नही
हवाओं को बहेनेसे रोक लो अभी
कही ये पैगाम ए मुलाकात तो नही !!

जमी चाँद तारे मिलने को है अभी
कही ये बारात ए शब तो नही
इन ख्वाबों मे ज़ी ले दो अभी
कही ये चस्मे ए खुमारी तो नही !!

आँखोमे उनके है इकरार अभी
कही ये शोखी ए इज़हार तो नही
फलक से उतर आई है हूर अभी
कही ये वजह ए तसल्ली तो नही !!

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline shardul

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Good kavita...thanks for posting

 

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