Author Topic: * मेरा भारत महान *  (Read 575 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* मेरा भारत महान *
« on: October 24, 2015, 08:58:00 PM »
* मेरा भारत महान *
क्या सचमें है मेरा देश महान
जहां जाती-पाती में बटा है इन्सान
एक ही है अल्लाह और भगवान
फिर भी क्यों नहीं समझते ये नादान

कही हो रहा है दलितों पर अत्याचार
तो कही हो रहे हैं कुकर्म बलात्कार
बेटे की चाहत में कोख में मर रही बेटियाँ
क्या यही है हमारी पहचान और संस्कार

भूखे सो जाते हैं बच्चे और परिवार
और हम धुमसे मनाते हैं लाखोंका त्योहार
मर रहा है कर्ज में डुबा हमारा किसान
और क्रिकेटरों को करोडों का इनाम देती है सरकार

सरहदों पर होते शहीद जवान और  आतंकी हमले में मर रहे पुलीस जवान
इनको ना मिलता है मुआवजा यार
लेकिन शराब पीकर मरने पर लाखों का उपहार
और घरमें किसी एक को नौकरी देनेको तैयार

और तो और सुना है मैने यहातक
के देस मेरा अब डिजीटल हो रहा है
यहाँ नंगे बदनपर एक कपड़ा नही
और हर स्टेशन पर वायफाय हो रहा है

सुधर जाओ अभीभी वक्त है ए इन्सान
वरना ना तुझे अल्लाह माफ करेगा
ना बचाने को आयेंगे भगवान
वरना कैसे कहूं मेरा भारत महान.
कवी - गणेश साळुंखे.
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