Author Topic: अनिर्णायक  (Read 613 times)

Offline kumudini

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 118
अनिर्णायक
« on: May 01, 2013, 03:14:11 PM »
         
माझ्या   जीवनाचे  तारू

आहे  प्रवाह  पतित

भरकटत  वाहे

गटांगळ्या  खात

नाही  शीड  तयाला 

वारा  भरून  घ्यायला

 नाही  नावाडी  तयाला

 वाट  दाखवायला

कधी  वाहे  संथपणे 

कधी  भरधाव  वेगे

नाही  लक्ष्य  तयापाशी 

कोठे थांबायचे

अनिर्बंध वाहता  जरी

आपटून  खडकावरी

कधी  जाईल  फुटून

नेम  काही  नाही

                               कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता