Author Topic: रक्षक की भक्षक  (Read 543 times)

Offline kumudini

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रक्षक की भक्षक
« on: May 07, 2013, 03:14:12 PM »
   
जे  रक्षक  ते  भक्षक  झाले

ते  न्याय  कसा  करणार

गाळूनी  घाम  अंगीचा 

पिकवितो  मोती  दाण्याचा

जो  पोषक  जगताचा

दाण्याला  मोताद्च  झाले

गांधारी  न्याय  देवता

न्यायाधीश  धृतराष्ट्रा

सांगा  हे  न्याय  कुणाचा

काय  कसा  करणार

जो  नावाचा  बळी  राजा

जाहला  बळी  राजाचा

जाब  त्या  दुष्ट  राजाला 

कोण  कधी  पुसणार

बांधून  फास  तो  कंठी

मृत्यूस  घालूनी  मिठी

न्याय  तो  आपुला करण्या साठी 

                                कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता

रक्षक की भक्षक
« on: May 07, 2013, 03:14:12 PM »

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Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: रक्षक की भक्षक
« Reply #1 on: May 07, 2013, 04:47:29 PM »
पिकवितो  मोती  दाण्याचा

जो  पोषक  जगताचा

दाण्याला  मोताद्च  झाले  :( :( :(

खूप छान आहे कविता! :)

Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: रक्षक की भक्षक
« Reply #2 on: May 07, 2013, 05:03:37 PM »
so sad

 

With Quick-Reply you can write a post when viewing a topic without loading a new page. You can still use bulletin board code and smileys as you would in a normal post.

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