Author Topic: समजा मी,मी नसतो  (Read 1052 times)

Offline विक्रांत

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समजा मी,मी नसतो
« on: June 21, 2013, 08:38:27 PM »
समजा मी,मी नसतो
तर मग मी कोण असतो ?
अर्थात तरीही मी मीच असतो
पण आता जो मी आहे 
तो मी मुळीच नसतो
म्हणजे जो मी मला ओळखतो
तो मी तर मीच असतो
पण ज्याला मी ओळखतो
तो मी तेव्हा वेगळा असतो
त्या वेगळेपणात जेव्हा मी
मी पणे मीहून वेगळा असतो
त्या मी ला हि मीचा प्रश्न पडतो
तेव्हा जो मी मी ला शोधतो
त्या मी लाही मी नच मिळतो
कारण मी चे कळणे न कळणे
मी पणावर अवलंबून नसते

विक्रांत प्रभाकर             
« Last Edit: April 19, 2014, 01:11:30 AM by MK ADMIN »

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #1 on: June 22, 2013, 09:59:07 AM »
मी...मी.....मी.....मी.....मीच असतो confused  :-\ :-\ :-\ :-\ :-\

Offline विक्रांत

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #2 on: June 22, 2013, 06:45:37 PM »
yes it is bit confusing . ;)

Offline sweetsunita66

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #3 on: June 24, 2013, 10:12:57 PM »
ज्याने गवसले मी पणाला ,
नक्की त्याचा देवच हो झाला  :) :)

Offline विक्रांत

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #4 on: June 27, 2013, 11:03:35 PM »
 :) so sweet !

Offline केदार मेहेंदळे

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #5 on: July 01, 2013, 11:07:28 AM »
ho pan tarihi mi mich asto...chan kavita....

Offline विक्रांत

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Re: समजा मी,मी नसतो
« Reply #6 on: July 03, 2013, 04:44:41 PM »
thanks kedar