Author Topic: अंजान रास्ते  (Read 943 times)

Offline शिवाजी सांगळे

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  • या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे.....
अंजान रास्ते
« on: December 06, 2014, 12:16:40 AM »

अंजान रास्ते

ढुंढती है ये जींदगी
बिखरें हुये ख्वाबोंको
आये थे कभी जो
सुबह के ओंसकी तरहा।

बचपन भी नही मिला
बादलोंके छुपे चेहरे में,
हसता रहा तेरे तमाशेमें
जींदगी, जोकर की तरहा।

साया भी था कभी
साथ हमराह धुप में,
बढाता रहा वह फासला
अंजान रास्तो की तरहा।


© शिवाजी सांगळे

Marathi Kavita : मराठी कविता