Author Topic: रात  (Read 614 times)

Offline शिवाजी सांगळे

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  • या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे.....
रात
« on: February 22, 2015, 03:38:46 PM »
रात

हल्केसे रात ने   
कल मुझे जगाया,
अपना दर्द
चुपके सेे बताया !

सन्नाटा गिर्द
खामोशसा रहता है,
दूर से कहीं
चंद्रमाभी झांकता है !

जागती हूँ मैं
आंसु लिए बाहोमे,
कईयों के दर्द
छपायें हुये आहोंमें !

©शिवाजी सांगळे

Marathi Kavita : मराठी कविता