Author Topic: हाँ एक बार फिर से  (Read 529 times)

Offline janki.das

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हाँ एक बार फिर से
« on: February 17, 2016, 11:24:22 AM »

हां अब भी छुप छुप कर यूंही देख लेता हू उनको
हां वो आदत नही रही पहले जैसी की दिन रात नीहाराता रहूं
पर अब भी दिल करता है कभी यूँही मिलने का
हां दिल करता है कुछ दूर फिर से साथ चलने का .
मन को बहलाता हू
फुसलाता हू
किस्से कहानिया सुनाता हू
झूठी उमीदें तो नही पर
सच्चाई से रूबरू करवाता हू
हाँ ये सच है की दिल ने अब सवाल करने छोड़ दिए हैं
फ़िजूल के किस्से भी याद करना छोड़ दिए हैं
सच तो ये है की इस दिल को हमसे कोई उम्मीद नही
और हो भी क्यू जब हमें इस जिंदगी से कोई उम्मीद नही.
लेकिन फिर भी
अब भी उनसे मिलने का दिल करता है
जब भी उनकी गलियों से गुज़रता हूँ
एक बार मुड़ के देखने को दिल करता है
हाँ एक बार फिर से ...
-रितेश अम्बष्ठ

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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