सौरमंडल पर कविता 🪐

Started by Atul Kaviraje, August 10, 2025, 05:09:38 PM

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Atul Kaviraje

सौरमंडल पर कविता 🪐

पद्य 1
सूर्य है राजा, रोशन करता जहाँ,
आठ ग्रह मिलकर, सजाते हैं समाँ।
चक्कर लगाते हैं, हर पल उसके चारों ओर,
बनता है अपना, यह सौरमंडल का शोर।

अर्थ: यह बताता है कि कैसे सूर्य सौरमंडल का केंद्र है और आठ ग्रह उसके चारों ओर चक्कर लगाकर एक परिवार बनाते हैं।

पद्य 2
बुध है छोटा, सूर्य के सबसे करीब,
शुक्र है चमकीला, जैसे कोई नसीब।
धरती है प्यारी, जीवन का है धाम,
लाल मंगल पर, हो रहा काम तमाम।

अर्थ: यह शुरुआती चार ग्रहों, बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल का वर्णन करता है, और उनके खास गुणों को बताता है।

पद्य 3
बृहस्पति है विशाल, सबसे बड़ा ग्रह,
उसके साथी कई, हैं ग्यारह के अंदर।
शनि के वलय, लगते हैं खूबसूरत,
रहस्यमयी है यह, जैसे कोई मूरत।

अर्थ: यह बृहस्पति के बड़े आकार और शनि के वलयों की सुंदरता का वर्णन करता है।

पद्य 4
अरुण है लेटा, घूमता है उल्टा,
वरुण है दूर, वहाँ का मौसम है बहुत ही उल्टा।
ठंडी हवाएँ चलती हैं, वहाँ बहुत ही तेज़,
सबसे दूर का ग्रह, अंतरिक्ष का एक तेज।

अर्थ: यह अरुण और वरुण के विशेष गुणों का वर्णन करता है, जैसे उनकी घूमने की दिशा और वरुण का सबसे दूर स्थित होना।

Pady 5
आंतरिक ग्रह हैं चट्टानी और ठोस,
बाहरी ग्रह हैं, जैसे गैसों का एक कोष।
रंग-बिरंगे हैं, उनकी चालें हैं निराली,
हर एक की कहानी, है बहुत ही निराली।

अर्थ: यह ग्रहों को आंतरिक और बाहरी श्रेणियों में बाँटता है और उनके अलग-अलग गुणों का वर्णन करता है।

Pady 6
प्लूटो था नौवाँ, पर अब नहीं है,
बौने ग्रहों के परिवार में, वह रहता है।
परिक्रमा करते हैं, अपनी धुन में,
यह सौरमंडल, रहता है अपनी मौज में।

अर्थ: यह बौने ग्रह प्लूटो की कहानी बताता है और समझाता है कि उसे अब ग्रहों के परिवार में क्यों नहीं गिना जाता है।

Pady 7
यह सिर्फ ग्रह नहीं, एक ब्रह्मांड है,
अनगिनत तारों का, यह एक गुमान है।
सौरमंडल हमारा, है बहुत ही खास,
क्योंकि यहाँ है जीवन, और एक नया एहसास।

अर्थ: यह अंतिम पद सौरमंडल को सिर्फ ग्रहों का समूह नहीं, बल्कि एक खास और जीवन से भरा ब्रह्मांड मानता है।

--अतुल परब
--दिनांक-10.08.2025-रविवार.
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