Author Topic: मैत्री  (Read 9017 times)

Offline mrunalwalimbe

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मैत्री
« on: July 31, 2013, 03:58:02 PM »
          मैत्री
मैत्री असावी पाण्यासारखी
         निर्मळ, नितळ, स्वछ जशी
मैत्री असावी समुद्रासारखी
         उधाण आलेल्या बेधुंद लाटच जशी
मैत्री असावी घनदाट वृक्षासारखी
          थकलेल्या जीवाला सावली देणारी
मैत्री असावी स्वच्छंदी
           फुलपाखरासारखी
मैत्री असावी नात्यांपलीकडची
             जात, धर्म,वय, भाषा न झुगारणारी
मैत्री असावी अशी
                की शब्दांत न मांडता येणारी
पण सुखं दु:खात नि:शब्द साथ देणारी
               अन् चिरंतन टिकणारी

                                                                मृणाल वाळिंबे
« Last Edit: July 31, 2013, 03:58:51 PM by mrunalwalimbe »

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: मैत्री
« Reply #1 on: August 10, 2013, 04:29:48 PM »
छान... :)

Offline niteshk

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Re: मैत्री
« Reply #2 on: November 22, 2013, 10:54:56 PM »
खूपच छान.....!

Offline Shrikant R. Deshmane

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Re: मैत्री
« Reply #3 on: January 03, 2014, 12:10:29 AM »
lai bhari rao...
khup chan mrunalji..
श्रीकांत रा. देशमाने.

[ कविता म्हणजे कागद,
लेखणी अन् तू... ]

Offline dipak chandane

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Re: मैत्री
« Reply #4 on: March 22, 2014, 12:56:21 PM »
Nice...................