Author Topic: चिऊतै चिऊतै  (Read 2493 times)

Offline shashaank

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चिऊतै चिऊतै
« on: September 14, 2012, 12:15:35 PM »
चिऊतै चिऊतै

(पुरंदरे शशांक)

चिऊतै चिऊतै
घरात का येत नै

दाणे खा थोडेसे
पाणी प्या जरासे

अंगणात छोटी थाळी
थाळीत गार पाणी

भुडुश (आंबो) करा चिव्चिव करुन
मग उडा पंख पसरुन....

आता हे बघा शामने सुसंस्कारित केलेले नवे वर्जन (बोबड्या स्वरात गोडी कित्ती वाढलीये ती .......)

चिऊतै चिऊतै
घलात का येत नै

दाणे खा थोलेसे
पाणी प्या जलासे

ठेवली मी अंगणात
पाण्याची पलात

भुडुश कला चिव्चिव कलून
मग उला पंख पशलून....

(शामकडे अशा नॅक (करामती) सापडतात सिद्धहस्त लेखक/ कवि असल्यामुळे..)


Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline केदार मेहेंदळे

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Re: चिऊतै चिऊतै
« Reply #1 on: September 14, 2012, 12:33:47 PM »
mast....

SUKUMAR NAANE

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Re: चिऊतै चिऊतै
« Reply #2 on: September 25, 2012, 03:10:51 PM »
BHARICH  AAHE

Offline Mandar Bapat

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Re: चिऊतै चिऊतै
« Reply #3 on: September 26, 2012, 11:48:32 AM »
chan...aawdli

Offline shashaank

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Re: चिऊतै चिऊतै
« Reply #4 on: December 14, 2012, 09:55:25 AM »
सर्वांना मनापासून धन्यवाद