Author Topic: माझे पुण्यक्षेत्र  (Read 809 times)

Offline kumudini

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माझे पुण्यक्षेत्र
« on: May 09, 2013, 03:38:30 PM »
 
नकोच  मजला  कशी  अन  नकोच  रामेश्वर

पुण्यक्षेत्र  हे  माझ्यापाशी  माझे  पंढरपूर

विश्वेश्वर  हा  उभा  सावळा  इथे  विटेवर

चंद्रभागा  ही  गंगा  वाहे  त्याच्या  चरणावर

वनी जाऊनी  राखीतसे  हा  चोखोबाची  गुर

गोरोबाच्या  मडक्यांना  घडवून  देतो  आकार

नित्यच  असते  मायापाखर  भक्तांच्या वरी

बोरू  होऊन  ज्ञानेशाची  लिहितो  ज्ञानेश्वरी

नामाचाही  हट्ट  पुरवितो  चाखुनिया  खीर 

भक्ता साठी  सिद्ध  विठोबा  ठेउनिया  कटी  कर   

                                                                  कुमुदिनी काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: माझे पुण्यक्षेत्र
« Reply #1 on: May 10, 2013, 11:48:40 AM »
छान भक्तीभाव आहे! :) :) :)

Offline विक्रांत

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Re: माझे पुण्यक्षेत्र
« Reply #2 on: May 11, 2013, 10:08:52 PM »
keep it up . :)

Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: माझे पुण्यक्षेत्र
« Reply #3 on: May 13, 2013, 10:18:29 AM »
khup chan...