Author Topic: भूपाळी श्रीकृष्णाची  (Read 779 times)

Offline kumudini

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उठ रे सावळ्या

जागरे  तान्हुल्या 

जागवाया  तुला

प्राची  तेजाळली 

येऊनी  अंगणी 

थांबले  सवंगडी

ऊठ   गा  श्रीहरी

बोलली   माउली

धेनू   हम्बारल्या 

 साद   घाली  तुला   

ऊठ   गा   सावळ्या

 आता   सत्वरी

सूर्य   आला  नभी

तेज   पुंजाळूनी

 साद  घाली   तुला

पावनही   गाउनी

करुनिया   मंथना

काढूनी   नवनीता

भरविण्या  तुला

थांबले  मी  उभी 

कुरवाळुनी   मुखा 

घेतसे  चुंबना

हासुनी  गाली  तो

जागला  श्रीहरी

                          कुमुदिनी   काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline विक्रांत

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Re: भूपाळी श्रीकृष्णाची
« Reply #1 on: May 20, 2013, 05:21:27 PM »
वा फारच छान ,मन प्रसन्न झाले.