Author Topic: प्रसादा द्यावे गुरुनाथा  (Read 699 times)

Offline vijaya kelkar

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       प्रसादा द्यावे गुरुनाथा

  जीव कळवळे चिंता भया
  मग थरथरे ही काया
  जन्म त्यातची जाता वाया
  अंती तव पदी ठेवी माथा
      प्रसादा द्यावे गुरुनाथा .....
  जीवनी विवेकाचा चुना लाविला
  सुख-दु:खाची सुपारी,लवंग टोचणीला
  विडा तयार झाला,रंगला
  लाविता सत्संगाच्या काथा
      प्रसादा द्यावे गुरुनाथा ......
  आलो संसारी कुणा ना विचारता
  नादात रंगून जाता जाता
  विचरता पाहिले वारकरी पंथा
  विसरलो मी व्यथा कथा 
      प्रसादा द्यावे गुरुनाथा .....
  तूचि माता-पिता या अनाथा
  ठेवावा शिरी तव हाता
  वां दूर  लोटी मारुनी लाथा
  तव स्पर्शची पुरे हरण्या गर्व वृथा 
       प्रसादा द्यावे गुरुनाथा .....
  मनी विचारांची जाळी
  लेखणीत शाई काळी
  लिहिता चार-चार ओळी
  बनेल विजयाची गाथा
       प्रसादा द्यावे गुरुनाथा .....

                      विजया केळकर __







Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
तूचि माता-पिता या अनाथा
  ठेवावा शिरी तव हाता
  वां दूर  लोटी मारुनी लाथा
  तव स्पर्शची पुरे हरण्या गर्व वृथा 

 
far chan

Offline sweetsunita66

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  • प्रेमा साठी जगणे माझे ।
जीवनी विवेकाचा चुना लाविला
  सुख-दु:खाची सुपारी,लवंग टोचणीला
  विडा तयार झाला,रंगला
  लाविता सत्संगाच्या काथा
                          :) छान कविता ,आवडली
                             

Offline vijaya kelkar

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    केदार आणि सुनीता प्रणाम __/\__
    --श्री गुरुदेव दत्त --

 

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