Author Topic: शरद पौर्णिमा  (Read 915 times)

Offline kumudini

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शरद पौर्णिमा
« on: September 10, 2013, 04:57:30 PM »
                                               

शरद  पुनव अंबरात
पूर्ण बिंब  तेजाळत
निळ्या  निळ्या  नभात
चमचम  चांदणे  फुलत
जोत्स्नेच्या  रजत  झोती
अवनी  ही  सुस्नात  होत
चंद्र  तेज  न्याहाळत
कासारी  कुमुदिनी  फुलत
पाहूनी  शशी  नभात
सागरही  उचंबळत
वेलीवर  फुलत  कळ्या
अधीर  चंद्र  पाहण्यास
ही  अशी  शरद  रात
न  जाय  विस्मृतीत
                        कुमुदिनी  काळीकर 


Marathi Kavita : मराठी कविता

शरद पौर्णिमा
« on: September 10, 2013, 04:57:30 PM »

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