Author Topic: "नजर" नही कभी "नजरिया" बदल के देखो.  (Read 829 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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हमेशा जरूरी नही की आखे
जो देखे और कान जो सुने वही सच हो.
जीस तरह एक आम ईनसान सोना और
पीतल मे पेहेचान नही कर सकता,
ठीक उसी तरह वो झूट और
गलतफहमी की पेहेचान
भी नही कर सकता. "नजर"
नही कभी "नजरिया" बदल के देखो.
- अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline सतिश

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Good Trial..

 

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