Author Topic: * सिपाही *  (Read 469 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* सिपाही *
« on: September 21, 2014, 10:37:42 PM »
कोई खुदको यहाँ बादशाह तो
कोई सिकंदर समझता है
लेकिन हम खुदको सिर्फ
एक सिपाही समझते हैं
क्योंकि हमारे बिना ना बादशाह
जित सकता है और नाही सिकंदर जित सकता है...!
कवी-गणेश साळुंखे...!
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