Author Topic: * खामोशी *  (Read 731 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* खामोशी *
« on: September 23, 2014, 03:20:03 PM »
मेरी खामोशी किसी तुफानसे कम नहीं
खुल गयी जुबान तो कयामत ढाएगी वहीं
हर लफ्ज़ बनेंगा शोला और मचाएगा तबाही
इसिलिये अच्छी लगती है हमें खामोशी की गहराई...!
कवी-गणेश साळुंखे...!
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