Author Topic: * तेरी गलिया *  (Read 783 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* तेरी गलिया *
« on: November 18, 2014, 09:28:12 PM »
जब भी गुजरे
तेरी गलियोंसे हम
दरवाजे था बंद
और खिडकीमें सनम...!
कवी-गणेश साळुंखे...!
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Mumbai

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