Author Topic: * मौहब्बत का आलम *  (Read 490 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* मौहब्बत का आलम *
« on: November 21, 2014, 06:23:20 PM »
मौहब्बत का आलम अब ऐसा है
माशुक की चाह जैसे सजा है
हर बार टूटता है दिल
और आशिक फिर दिल लगाता है...!
कवी-गणेश साळुंखे...!
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