Author Topic: * कसम *  (Read 597 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* कसम *
« on: February 16, 2015, 09:27:30 AM »
भुलाकर तुझे जी रहा हू में
हो जिक्र तेरा जहा कहीपर
अक्स भी अपना वहासे छुपा रहा हू में
कसम तुझसे दुर रहने की सनम
बहखुबी निभा रहा हू में...!
कवी-गणेश साळुंखे...!
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