Author Topic: * हम *  (Read 395 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* हम *
« on: March 25, 2015, 03:55:10 PM »
जब हम बरसते है
तो लोग गरजना भुल जाते है
जंगलमे दहाडने वाले शेर भी
हमारे आतेही छुप जाते है.
कवी-गणेश साळुंखे.
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