Author Topic: * रुठा यार *  (Read 562 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* रुठा यार *
« on: June 27, 2015, 08:42:32 PM »
रब रुठे तो रुठे
में गम ना करुंगा
जो मेरा यार रुठेगा
तो में जान दे दुंगा.
कवी-गणेश साळुंखे.

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