Author Topic: * शीशे का दिल *  (Read 436 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* शीशे का दिल *
« on: July 19, 2015, 03:46:46 AM »
पत्थर की इस दुनिया में
शीशे का दिल है मेरा
बचते बचाते चलता हुँ सबसे
के कही टुट न जाए दिल मेरा.
कवी-गणेश साळुंखे.

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