Author Topic: * लोग *  (Read 348 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* लोग *
« on: August 23, 2015, 06:06:19 PM »
सुनकर भी अनसुना कर देते है लोग
जबतक बात उनके मतलबकी ना हो
जरासी बात तुम उनके मतलब की करो
तो घेरा डाल इकठ्ठा हो जाते है लोग.
कवी-गणेश साळुंखे.
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