Author Topic: * श्रावणधारा *  (Read 329 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* श्रावणधारा *
« on: September 10, 2015, 11:09:40 PM »
मंद धुंद गार वारा
अंगावरती उठे शहारा
तव येता मिठीत तु
बरसती जणु श्रावणधारा.
कवी - गणेश साळुंखे.
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