Author Topic: * हमारे लिए *  (Read 379 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* हमारे लिए *
« on: September 15, 2015, 09:52:25 AM »
ए बेरहम जरुरी नही के
हम तेरे गम के साथ जिये
वो तो हम ही मेहरबान थे तुमपर
वरना हजारो दिल धडकते है
आज भी हमारे लिए.
कवी - गणेश साळुंखे.
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