Author Topic: * रुठे हुए *  (Read 2202 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* रुठे हुए *
« on: October 25, 2015, 01:54:46 PM »
रुठ भी जाए हम तो
हमें मनाता कोई नहीं
इसलिए हम खुद ही
रुठोंको मना लेते हैं.
कवी - गणेश साळुंखे.
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