Author Topic: * रातभर जागते हैं *  (Read 422 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* रातभर जागते हैं *
« on: October 28, 2015, 11:41:03 PM »
करके तुझसे ना मिलने का वादा
हम नींद से दुश्मनी कर बैठे हैं
हो जाएगी फिर मुलाकात ख्वाबोमें
इसलिए रातभर जागते रहते हैं.
कवी - गणेश साळुंखे.
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