Author Topic: * किनारा *  (Read 438 times)

Offline कवी-गणेश साळुंखे

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* किनारा *
« on: October 30, 2015, 11:23:39 PM »
देख सकते हो देखो
आकर तुम हाल मेरा
मानो जैसे डुब रहा हुँ
और सामने हैं किनारा.
कवी - गणेश साळुंखे.
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