Author Topic: दीखावे की मुस्कान है  (Read 638 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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दीखावे की मुस्कान है
« on: November 02, 2014, 01:29:17 PM »
दीखावे की मुस्कान है...
तनहाई मे डुबी हर एक शाम है...
बीखरा है कई टुकडो मे ये दील...
मगर "जिंदादीली" इस दील की पेहेचान है....

- अनामिका
« Last Edit: November 02, 2014, 01:53:58 PM by MK ADMIN »

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