Author Topic: रात की ईस तनहाई मे कुछ दर्द खंगाले जाते है आखो से गीरते गीरते कुछ अश्क संभाले जाते है...  (Read 642 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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रात की ईस तनहाई मे कुछ दर्द खंगाले जाते है
आखो से गीरते गीरते कुछ अश्क संभाले जाते है...
- अनामिका